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जिला एवं उपखण्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस पंचायत स्तर तक पुख्ता हो क्वारेंटाइन व्यवस्था प्रवासियों को नहीं हो कोई असुविधा - मुख्यमंत्री

जिला एवं उपखण्ड स्तरीय अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस  
पंचायत स्तर तक पुख्ता हो क्वारेंटाइन व्यवस्था
प्रवासियों को नहीं हो कोई असुविधा - मुख्यमंत्री
 
जयपुर, 13 मई। मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोरोना संक्रमण को नियंत्रित करने में जो कामयाबी हमें अभी तक मिली है उसे बरकरार रखने के लिए क्वारंटाइन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। अभी तक शहरों में कोरोना के मामले सामने आ रहे थे, लेकिन अब यह संक्रमण गांवों में नहीं फैले, इसके लिए क्वारंटाइन व्यवस्था का सुदृढ़ होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि बाहर से आने वाले प्रवासियों को किसी तरह की असुविधा नहीं हो और साथ ही क्वारंटाइन में रखे गये लोगों की मॉनिटरिंग के पुख्ता इंतजाम हों।
 
श्री गहलोत बुधवार को मुख्यमंत्री निवास से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जिला कलक्टर, जिला एवं उपखंड स्तरीय अधिकारियों से क्वारंटाइन व्यवस्थाओं पर चर्चा कर रहे थे। 
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले से लेकर पंचायत स्तर तक मौजूद सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को मिलकर क्वारंटाइन व्यवस्था को ग्राम स्तर तक सुचारू बनाना होगा। इस काम में सांसदों, विधायकों के साथ-साथ सभी शहरी एवं पंचायत जनप्रतिनिधियों की बड़ी भूमिका है। उन्होंने कहा कि ट्रेन से आने वाले लोगों की रेलवे स्टेशन पर ही स्क्रीनिंग करवाकर बसों से उन्हें गन्तव्य स्थल तक पहुंचाने की व्यवस्था करें। संभव हो तो रेलवे स्टेशन पर उन्हें चाय-नाश्ता उपलब्ध कराएं और बसों में खाने के पैकेट व पानी रखवाया जाए, ताकि उन्हें आगे के सफर मे आसानी हों। मुख्यमंत्री ने कहा कि जालोर, सिरोही एवं पाली जैसे जिलों को क्वारंटाइन व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना होगा। क्योंकि वहां बाहर से आने वाले प्रवासियों की संख्या हजारों में है। डूंगरपुर एवं भरतपुर जैसे सीमावर्ती जिलों को भी प्रवासियों के लिए समुचित इंतजाम रखने होंगे।
 
जिला स्तर पर और सुदृढ़ करें जांच सुविधाएं
 
श्री गहलोत ने निर्देश दिए कि टेस्टिंग की जरूरतों को देखते हुए जिला स्तर पर जांच सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाये। जालौर, पाली, सिरोही, बांसवाड़ा, बाड़मेर सहित वे सभी जिले जहां प्रवासी अधिक आ रहे हैं, जल्द से जल्द जांच सुविधाएं विकसित की जाएं।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लें
 
श्री गहलोत ने कहा कि बाहर से आने वाले प्रवासियों के क्वारंटाइन के लिए स्थानीय विधायकों एवं अन्य जनप्रतिनिधियों का सहयोग लें, उनसे संपर्क स्थापित करें ताकि बेहतर तालमेल के साथ ग्राम स्तर पर व्यवस्थाएं सुनिश्चित हो सकें। क्वारंटाइन के लिए जगह चिन्हित करने और ग्राम स्तर पर बनाये गये संस्थागत क्वारंटाइन सेंटर्स पर भोजन-पानी की व्यवस्था में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों का सहयोग लिया जाए। गांव वालों को भी विश्वास में लेकर होम क्वारंटाइन रखे गए एवं बाहर से आने वाले प्रवासियों की मॉनिटरिंग में उनका सहयोग लिया जाए। एनसीसी, एनएसएस, स्काउट और नेहरू युवा केन्द्र से जुड़े युवाओं का भी सहयोग लिया जा सकता है। 
 
राजस्थान ने प्रो-एक्टिव होकर काम किया
 
मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा के समय जिस गंभीरता से काम किया जाता है वैसा हमारे प्रशासन एवं पुलिस के अधिकारियों, सरकारी कर्मचारियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं भामाशाहों सभी ने मिलकर किया है। कोरोना का सामना करने में राजस्थान ने प्रो-एक्टिव होकर काम किया है। कोरोना संक्रमण रोकने के लिए यहां अपनाये गये उपायों की देश-विदेश में जमकर प्रशंसा हुई है। स्वास्थ्य सेवाओं का ढांचा मजबूत करते हुए हमें आगे भी इसी जज्बे के साथ लड़ाई जारी रखनी होगी। हमें कोरोना के साथ जीना सीखना होगा। 
 
उन्होंने कहा कि जहां तक संभव हो बाहर से आने वालों को होम क्वारंटाइन रखा जाए, जरूरी हो तभी उन्हें संस्थागत क्वारंटाइन किया जाए। क्वारंटाइन में रखे गए लोगों में किसी तरह के लक्षण दिखाई दें तो उनकी जांच कर उन्हें कोविड सेंटर में भेजा जाए। 
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रवासी श्रमिक सड़क पर पैदल दिखाई दें तो उन्हें बसों के माध्यम से आगे भेजने की व्यवस्था की जाए अथवा उन्हें केंप में पहुंचाकर उनके लिए भोजन की व्यवस्था की जाए। राज्य सरकार ने उनके लिए बसों और ट्रेनों की व्यवस्था की है। 
 
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि प्रदेश में अभी 12 हजार से ज्यादा टैस्टिंग की सुविधा प्रतिदिन उपलब्ध है। राजस्थान में कोरोना रोगियों का रिकवरी रेट भी काफी अच्छा है। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र एवं जिला अस्पतालों में अन्य बीमारियों का समुचित इलाज हो यह सुनिश्चित किया जाए।
 
प्रवासियों का पंजीकरण और स्क्रीनिंग हो
 
मुख्य सचिव श्री डीबी गुप्ता ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा जारी संशोधित गाइडलाइन के तहत प्रदेश में कहीं भी आने-जाने के लिए पास की जरूरत नहीं है। सिर्फ कफ्र्यू वाले क्षेत्रों में आना-जाना अनुमत नहीं है। उन्होंने कहा कि अन्तर्राज्यीय आवागमन आसान होने के बाद बाहर से आने वालों की संख्या काफी बढ गयी है। ऎसे में अधिकारी प्रवासियों के क्वारंटाइन की व्यवस्था पर फोकस करें। सीमावर्ती जिलों में आवश्यक रूप से प्रवासियों के पंजीकरण और स्क्रीनिंग के साथ उनके लिए बसों की व्यवस्था पर ध्यान दिया जाए। जिन लोगों में कोविड-19 के लक्षण दिखाई दें उन्हें कोविड केयर सेंटर में भेजने की व्यवस्था की जाए। उन्होंने कहा कि क्वारंटाइन किए गए लोगों के साथ अछूत की तरह व्यवहार न हो लेकिन सोशल डिस्टेंसिंग की पालना की जाए।
 
अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह श्री राजीव स्वरूप एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव चिकित्सा श्री रोहित कुमार सिंह ने भी कलक्टर्स एवं अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग श्री सुबोध अग्रवाल ने प्रवासियों के लिए की जा रही बसों एवं ट्रेनों की व्यवस्था जबकि जेडीए आयुक्त श्री टी. रवीकांत ने जयपुर शहर में की गई क्वारंटाइन सेंटर्स की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। 
 
वीसी के दौरान जालोर, सिरोही, पाली, नागौर, भरतपुर, जोधपुर, उदयपुर, भीलवाड़ा एवं डूंगरपुर के कलक्टर ने बाहर से अभी तक जिले में आये प्रवासियों की संख्या और उनके लिए की गई क्वारंटाइन सहित अन्य व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। 
 
इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री भूपेन्द्र सिंह यादव, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्री निरंजन आर्य, अतिरिक्त मुख्य सचिव पीडब्ल्यूडी श्रीमती वीनू गुप्ता, सचिव चिकित्सा शिक्षा श्री वैभव गालरिया, सूचना एवं जनसम्पर्क आयुक्त श्री महेन्द्र सोनी सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।